भारत का संवैधानिक विकास (Constitutional Development in India)

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भारत का संवैधानिक विकास

संविधान क्या है?

किसी भी देश की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक एवं संस्कृतिक व्यवस्था के अनुरुप सरकार की नीतियो को संचालित करने की वैधानिक प्रक्रिया को संविधान कहते हैं |

  • बंगाल का गवर्नर
  • बंगाल का गवर्नर जनरल
  • भारत का गवर्नर जनरल
  • भारत का वायसराय
  • भारत का गवर्नर जनरल

भारतीय संविधान का विकास

  1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन भारत का संवैधानिक विकास(1773ई-1853ई)
  2. ब्रिटिश ताज के अधीन भारत का संवैधानिक विकास (1853ई-1935ई)

01.ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन भारत का संवैधानिक विकास(1773ई-1853ई)

भारत का संवैधानिक विकास (Constitutional Development in India)
■रेग्युलेटिंग एक्ट(1773ई):-

(1)बंगाल, मद्रास,और बम्बई प्रेसीडेंसी को एक किया गया तथा बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल बनाया गया |

(2) 4 सदस्यीय परिषद का गठन प्रशासनिक कार्यो मे गवर्नर जनरल की सहायता के लिए किया गया |

(3) 1774 ई में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना हुई, इसके मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पी थे |

■पिट्स इंडिया ऐक्ट(1784):-

(1)Board of Control और Court of Directors की स्थापना हुई |

(2) सर्वोच्च न्यायालय में अंग्रेजी कानून के अनुसार न्याय की बात की गई |

(3) वारेन हेस्टिंग्स पहला अधिकारी था जिसपर महाभियोग चलाया गया |

■ चार्टर एक्ट(Charter Act)
(#)1793 का चार्टर एक्ट:-

(1) कंपनी के कर्मचारियों को उपहार लेने से मना कर दिया गया

(2)कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार 20 वर्ष के लिया बढ़ा दिया गया |

(3)नियंत्रक मंडल के सदस्यों का वेतन भारतीय राजस्व से दिया जाना तय हुआ |

(#)1813 का चार्टर एक्ट:-

(1)भारतीय चाय तथा चीन के साथ व्यापार छोडकर अन्य सभी व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया |

(2)ईसाई मिशनरी समुदाय को धर्मप्रचार की अनुमती मिला|

(#)1833 का चार्टर एक्ट:-

(1)कंपनी के समस्त व्यापारिक को समाप्त कर दिया गया |

(2)बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल (लार्ड विलियम बैन्टिक)बनाया गया |

(#)1853 का चार्टर एक्ट:-

(1)भारत के लिए पहली बार 12 सदस्यों के विधान मंडल का गठन हुआ |

(2)कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए प्रतियोगि परीक्षा को आधार रखा गया |

[2]ब्रिटिश ताज के अधीन भारत का संवैधानिक विकास(1853ई -1935ई)

(#)1858 का अधिनियम:-

(1)इस अधिनियम के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया गया |

(2)Board of Control और Coart of Directer को भंग कर दिया गया |

(3)गवर्नर जनरल को वायसराय बनाया गया |

(4)वायसराय को भारत सचिव के अधीन कर दिया गया |

(5)भारत सचिव के लिए एक 15 सदस्यीय भारत परिषद का गठन हुआ |

(#)भारत परिषद अधिनियम (1861)

(1) इस अधिनियम के द्वारा वायसराय को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त हुई |

(2)मद्रास, बम्बई तथा बंगाल में एक -एक उच्च न्यायालय स्थापित हुआ |

(3)भारतीयों को विधान मंडल में प्रवेश मिला |

(#)भारत परिषद अधिनियम (1892):-

(1) भारतीयों को वार्षिक बजट पर प्रश्न पूछने का अधिकार मिला | अनुपूरक प्रश्न पूछने का अधिकार नहीं मिला |

(2)अप्रत्यक्ष मतदान प्रारंभ हुआ |

(#)भारत परिषद अधिनियम(1909):-

(1)इसे मार्ले-मिंटो सुधार कहा जाता हैं |मार्ले भारत के राज्य सचिव तथा मिंटो वायसराय थे |

(2) मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की शुरुआत हुई |

(#)भारत परिषद अधिनियम(1919):-

(1) इसे मोंटेगू-चेम्सफोर्ड सुधार कहा जाता हैं |मोंटेगू भारत के राज्य सचिव तथा चेम्सफोर्ड वायसराय था |

(2)प्रांतों में दोहरी शासन प्रारंभ हुआ |

(3)मुस्लिम, सिक्ख, आंग्ल-भारतीय,ईसाई,यूरोपीय लोगों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल बनाया गया |

(4)UPSC और CAG का पद बनाया गया |

(5)महिलाओ को मतदान का अधिकार मिला |

(#)भारत परिषद अधिनियम(1935):-

(1)यह भारत का अबतक का सबसे बडा अधिनियम था |

(2) प्रांतों में दोहरा शासन समाप्त हुआ और केंद्र में दोहरा शासन प्रारंभ हुआ |

(3)321 अनुच्छेद, 10 अनुसूची तथा 14 भाग था|

4)यह अंतिम भारत परिषद अधिनियम था |

(5)इस अधिनियम के द्वारा केंद्र में द्वौध शासन की स्थापना हुई

(6)संघीय न्यायालय की स्थापना हुई |जिसमें 1 मुख्य न्यायाधीश तथा 2 अन्य न्यायाधीश होते थे |

*1939 से 1945 तक द्वितीय विश्वयुद्ध चला |

*1945-46 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी तथा क्लिमेण्ट रिचर्ड एट्ली प्रधानमंत्री बने |

(#)भारतीय स्वाधीनता अधिनियम(1947)

(1)18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश क्राउन द्वारा इस अधिनियम को स्वीकार किया गया |

(2)भारत और पाकिस्तान नाम के दो राष्ट्रों का गठन हुआ |

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