विदेशी आक्रमण

विदेशी आक्रमण

मध्यकालीन इतिहास मे हुए विदेशी आक्रमण को दो तरह से देखा जा सकता हैं–

(1)-अरबी आक्रमण

(2)- तुर्की आक्रमण 

अरबी आक्रमण

 712 ई. में मोहम्मद बिन कासिम ने पहली बार भारत पर प्रथम विदेशी आक्रमण किया तथा सिंध प्रांत के देवल (नेरुन नगर) पर अधिकार किया |मोहम्मद बिन कासिम ने जाटों की राजधानी शिसम पर भी आक्रमण कर के जीत लिया |

दूसरे खालिफा (खालिफा उमर साहब) के समयकाल में अरब आक्रांताओ ने देवल, भडौच तथा थाने पर आक्रमण किया लेकिन असफल रहे |

अरब आक्रमण के दौरान 711 ई. – 712 ई. में रावर का युद्ध राजा दाहिर और मोहम्मद बिन कासिम के मध्य हुआ |

देशद्रोही सरदार मोकाह की सहायता से मो• बिन कासिम रावर का युद्ध जीत गया तथा राजा दाहिर की हार हुई 

रावर का युद्ध अरबों के लिए सफल रहा |

अरबों के भारत आक्रमण की विस्तृत जानकारी बिलादुरी के पुस्तक फुतूल- अल बलदान तथा अबु- बर्क कुफी की पुस्तक चचनामा से मिलती हैं |

715 ई. में खलीफा सुलेमान ने मोहम्मद बिन कासिम की हत्या करवा दिया तथा अरब सरदारो ने 2 स्वतंत्रता राज्य एक मुल्तान में मनसूराह तथा दूसरा सिन्धु नदी के किनारे अरोर को स्थापित किया और सिंध तथा मुल्तान पर लगभग 150 सालों तक खलीफा का शासन रहा

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अरब आक्रमण से संबंधित कुछ तथ्य:-

  1. जजिया कर को भारतीय हिन्दूओ पर आरोपित करने वाला शासक मोहम्मद बिन कासिम था |
  2. अरब आक्रमण के बाद भारत में ऊंट पालने तथा खजूर की खेती का शुरुआत हुआ |
  3. अरबों ने भारत में ‘ दिरहम ‘ नाम के चांदी के सिक्का चलाया |
  4. अरबों ने भारतीय पुस्तको का अरबी भाषा में अनुवाद किया | जिसमें चरक संहिता (चरक) का अनुवाद हुआ |
  5. पंचतंत्र का अनुवाद अरबी भाषा में कलीलाह या दिमना नाम से किया गया |
तुर्की आक्रमण

अलप्तगीन सामानि साम्राज्य का एक तुर्क दास अधिकारी तथा खुरासान का राज्यपाल था जिसने गजनी वंश का स्थापना किया अलप्तगीन कभी भारत नहीं आया, अलप्तगीन के बाद उसका दास तथा दामाद सुबुक्तगीन शासक बनते ही भारत के हिन्दू शासक जयपाल के विरुद्ध 986 ई. में आक्रमण किया |

तुर्क आक्रमणकारियो का शुरुआत में उद्देश्य भारत में लूटपाट करने तक सीमित था |

महमूद गजनवी ( 999 ई.-1030 ई.):-

 यह सुबुक्तगीन का पुत्र था जो संस्थान के खलीफा को हराकर शासक बना तथा सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला  पहला मुस्लिम शासक बना | 

  • 1001 ई. से 1027 ई. तक इसने भारत पर कुल 17 बार आक्रमण किया |
  • इसके द्वारा मंदिरों को तोड़ा तथा मूर्तियों को  नष्ट किया, इसे बुतशिकन (मूर्तियों को तोड़ने वाला) कहा गया |
  • बगदाद के खलीफा अल-कादिर-बिल्लाह ने महमूद गजनवी को यमिन- उद- दौला तथा यमिन-उद- मिल्लाह की उपाधि दी |
  • गजनवी ने भारत पर पहला आक्रमण 1001 ई. में राजा जयपाल के विरुद्ध किया, हार के बाद राजा जयपाल ने आत्महत्या कर लिया |
  • 1008 ई. महमूद गजनवी ने नगरकोट पर मूर्तिवाद के खिलाफ आक्रमण किया |
  • महमूद गजनवी ने 1025 ई. में गुजरात के सोमनाथ मंदिर को लुटा तथा ध्वस्त किया, गजनवी का सोमनाथ अभियान सबसे चर्चित अभियान था |
  • इसका अंतिम आक्रमण 1027 ई. में सिंध के जाटो के खिलाफ था |
  • महमूद गजनवी का मृत्यु 1030 ई. में हुआ |
  • गजनवी के भारतीय सेना का सरदार एक हिन्दू था जिसका नाम तिलक था |
  • इसके सिक्के पर इसका नाम केवल अमीर महमूद अंकित हैं |
  • महमूद गजनवी के साथ भारत में कुछ कवि तथा लेखक आये जिनकी रचनाएं उस काल के इतिहास को जानने का एक महत्त्वपूर्ण स्त्रोत है–

कवि/रचनाकार.                  रचनाएं 

फिरदौसी।                         शाहनामा 

अलबरूनी।             तहकीक-ए-हिन्द(किताब-उल-हिन्द)

बैहाकी।                   तारिख-ए-सुबुक्तगीन 

उत्वी।                      किताब-उल-हिन्द

मोहम्मद गोरी

महमूद गजनवी के कबीले के अंत के बाद गोरी कबीले के द्वारा विदेशी आक्रमण तथा अधिकार हुआ | दिल्ली सल्तनत के निर्माण का मार्ग मोहम्मद गोरी ने ही प्रशस्त किया तथा भारत में पहली बार इस्लामी शासन की शुरुआत की |

 मोहम्मद गोरी गौर के शासक गयासुद्दीन का छोटा भाई था|

गोरी ‘गोमल दर्रे ‘ से भारत में प्रवेश किया और 1175 ई. में मुल्तान पर आक्रमण किया |

  • गोरी के गुजरात अभियान के समय 1178 ई. में वहां के शासक मुलराज II ( भीमदेव द्वितीय ) ने गोरी को बुरी तरह परास्त किया |
  • गोरी ने 1179 ई. में पेशावर पर अधिकार किया |
  • 1182 ई. में सिंध पर आक्रमण किया और वहां के शासक को अपने अधीन कर लिया |
  • गोरी ने1186 ई. में लाहौर पर विजय प्राप्त किया |

मोहम्मद गोरी के महत्वपूर्ण युद्ध 

तराईन का प्रथम युद्ध(1191 ई.):- दिल्ली-अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान तथा मोहम्मद गोरी के बीच तराईन के मैदान मे युद्ध हुआ, जिसमें गोरी पराजित हुआ तथा पृथ्वीराज चौहान का विजय हुआ |

तराईन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.):- इस युद्ध में गोरी का विजय हुआ |

चंदावर का युद्ध (1194 ई.):- मोहम्मद गोरी तथा कन्नौज के शासक जयचंद के मध्य चंदावर के मैदान मे युद्ध हुआ, जिसमें गोरी का विजय हुआ |

□ 1205 ई. में गोरी ने खोखरो के विरुद्ध अभियान चलाया तथा खोखरो को पराजित किया |

□ 1206 ई. में नमाज पढ़ते समय धोखे से गोरी की हत्या कर दी गई |

□ मोहम्मद गोरी के कुछ सिक्को पर एक तरफ शिव जी के बैल तथा पृथ्वीराज और एक तरफ मोहम्मद-बिन -साम लिखा था |

□ कन्नौज पर विजय के बाद गोरी ने कुछ सिक्कों पर देवी लक्ष्मी का अंकन कराया |

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